पिछली जीत के कारण भावी लड़ाई की अनदेखी ना करें !

इस बुधवार जैसे ही एक के बाद एक वक्ता उन पर तारीफों की वर्षा-सी करने लगे, वे उसकी अनदेखी करने के लिए मेरे नज़दीक आते गए | वे इतने विनम्र व् संकोची है कि ऐसी प्रशंसा सुनना उनके बस की बात नहीं है | चूँकि मैं उनके पास बैठा था, उन्होंने इस प्रशंसा से बचने के लिए मुझसे बातचीत शुरू कर दी |

अगले वक्ता छतीसगढ़ के कबीरधाम के सांसद अभिषेक सिंह थे | उन्होंने अपने चुनाब क्षेत्र के लगभग 20 हज़ार छात्रों को संबोधित करना शुरू किया, जो राज्य सरकार के मोटिवेशनल कार्यक्रम ‘युवा प्रेरणा’ का हिस्सा थे | यह कार्यक्रम 12 जनवरी को विवेकानंद जयंती तक चलने वाला है | एक्सएलआरआई, जमशेदपुर के छात्र रहे अभिषेक हेंडसम, खूब पढने वाले व्यक्ति हैं और भाषा पर भी उनका जबरदस्त प्रभुत्व है | उन्होंने सबसे सफल क्रिकेटरों में से एक तथा मौजूद भारतीय टीम के कोच अनिल कुंबले की जिन्दगी की झलक प्रस्तुत करना शुरू की | अभिषे ने कहा, ‘एक मैच में आपके सामने बैठे इस व्यक्ति का जबड़ा टूट गया | टीम के हर सदस्य, मेडिकल एक्सपर्ट और परिवार के लोगों ने उन्हें आगे न खेलने की सलाह दी, लेकिन उन्होंने किसी की नहीं सुनी | बड़े-से बेन्देज़ के साथ न सिर्फ उन्होंने बेटिंग की बल्कि गेंदबाजी भी करके भारतीय टीम की वह मैच जीतने में मदद की |’ स्टेडियम तब एक स्वर में विजयी स्वरों से गूंज उठा जब अभिषेक ने कुंबले की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘इस व्यक्ति को कौन भूल सकता है, जिसने एक मैच मैं पाकिस्तान के दस विकेट गिराकर इतिहास बना दिया |’ कुबले ने कुछ शर्मिंदा होकर मेरी ओर देखा, जबकि ‘पकिस्तान और दस विकेट’ जैसे शब्दों ने युवाओं को उत्साहित कर दिया | उसके बाद कुंबले संबोधित करने के लिए उठे | वहां मौजूद लोग रोमांचित हो गये कि वे जीत की ऐसी और कहानियाँ सुनाकर प्रेरित करेंगे, क्योंकि कार्यक्रम का नात ही ‘युवा प्रेरणा’ था |

कुंबले ने कुछ धीमे स्वर में बोलना शुरू किया | पूरा स्टेडियम सन्नाटे में डूब गया, क्योंकि हर व्यक्ति अपने इस हीरो को पूरी एकाग्रता से सुनना चाहता था | उन्होंने कहा, आप सबको नई दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान पर पाकिस्तान के खिलाफ दस विकेट लेने का वायदा याद है | हां, वह न सिर्फ आप सबके लिए व् पुरे देश के लिए बल्कि मेरे लिए भी ख़ुशी का पल था | लेकिन, आप में से किसी को वह बात याद नहीं जो मुझे आज तक याद है | अगला मैच चार दिनों बाद ही कोलकाता के ईडन गार्डन पर था और वहां मुझे सिर्फ एक विकेट मिला | वह गेंदबाज़ जिसने चार दिन पहले दसों विकेट लिए थे, उसकी झोली में सिर्फ एक विकेट था |’ भीड़ में चुप्पी छा गयी | अब कुंबले की आवाज़ ऊँची हो गई, अभिषेक सिंह से भी ऊँची | वे कहने लगे, ‘याद रखें मेरे लिए हर मैच शुन्य से शुरू होता है | हर बार जब मैं मैदान पर उतरता था तो मुझे नई उपलब्धि हासिल करनी होती थी | भूतकाल के मेरे रिकॉर्ड कभी मेरी वकालत नहीं कर पाते थे | यही जीवन का नियम है | हर दिन ऊँचे उठने के लिए एक नया रिकॉर्ड बनाएं और उसके लिए आप में शत-प्रतिशत समर्पण, प्रतिबधता होनी चाहिए |’ फिर उन्होंने बताया कि उनके गृहनगर बेंगलुरु में बारिश की वजह से कैसे उनके दोस्त अभ्यास छोड़ देते थे, जबकि वे शहर में ऐसी जगह खोजते रहते थे, जहां बारिश न हुई हो ताकि प्रैक्टिस जारी राखी जा सके | उन्होंने कहा, ‘यह खेल के प्रति मेरा समर्पण था | हालांकि, माता-पिता की इच्छा के मुताबित मैंने इंजीनियरिंग की पढाई की|’ जब उन्होंने भाषण समाप्त किया तो देर तक तालियाँ बजती रहीं |

#ManagementFunda

फंडा यह है कि हर दिन शून्य से शुरू होता है और पिछली जीत भविष्य की लड़ाई की अनदेखी करने का कारण नहीं बननी चाहिए |

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