डायरेक्ट सेलिंग चिट, फण्ड और पोंज़ी स्कीमों से अलग है

मार्केटिंग नेटवर्क के प्रकार

पूरी दुनिया में 1970 से लेकर आज तक डायरेक्ट सेलिंग के बाज़ार को नए नए बदलावों से गुजरता देखा गया है | समय के साथ साथ बहुत सारी कम्पनीज के द्वारा एक से एक मार्केटिंग तकनीक, डायरेक्ट सेल का प्रचार प्रसार किया गया है | लेकिंग दुर्भाग्यवश उसी समय बहुत सारी ऐसी कम्पनीज भी आई जिन्होंने डायरेक्ट सेल को MLM बना दिया और बजाये प्रोडक्ट की सेल के लोगो को ज्यादा से ज्यादा जोड़ने का काम बना दिया इसलिए बहुत लोगो का इस से विश्वास उठ गया था | बहुत सारी कम्पनीज के द्वारा किये गए फ्रॉड भी डायरेक्ट सेलिंग / नेटवर्क मार्केटिंग बिज़नस को बहुत प्रभावित किया है | और सबसे ज्यादा ये काम इन्टरनेट के द्वारा किया गया है जिसमे बैठे बैठे बिना समय लगाये पैसे कमाने के झांसे से लोग बर्बाद हुए | और आज के मेरे लेख में आप पड़ेंगे, डायरेक्ट सेल किस प्रकार से अलग है पोंज़ी स्कीमों से |

पिरामिड स्कीम्स

पिरामिड स्कीम्स जो कि बाज़ार में बहुत से तरीकों से प्रचलित है और ये स्कीम्स ऑफर करती है किसी भी बिसिनेस में नए लोगो को लाने के ऊपर ताकि ताकि लोगो को कमीशन दिया जा सके और प्रोडक्ट सेल पर बिलकुल भी जोर नहीं दिया जाता है | एक पिरामिड स्कीम में जो मुख्य बातें है वो ये है …
1. बिज़नस कोज्वाइन करने के लिए बहुत बड़ी फीस
2. भुगतान नए लोगो के आने पर होता है ना की प्रोडक्ट सेल पर
3. प्रोडक्ट की वापसी की कोई गारंटी नहीं होती

चिट-फण्ड स्कीम्स

इस प्रकार की स्कीम में भी प्रोडक्ट का कोई आधार नहीं होता है | इस तरह की चिट फण्ड स्कीम किस बचत बैंक खाते की तरह होती है, इसमें कोई भी व्यक्ति किसी कंपनी के साथ बहुत बड़े अमाउंट के साथ जुड़ता है और पैसे देने के बाद कंपनी के द्वारा उस व्यक्ति के साथ अग्रीमेंट किया जाता है और उस अग्रीमेंट के अनुसार, जितना भी पैसे वो देता है उस पैसे अनुसार उसको हर महीने कुछ अमाउंट दिया जायगा और ये मंथली अमाउंट कंपनी के द्वारा किसी भी प्रकार से निकला जा सकता है, या तो वो लोट के आधार पर दे सकते है या फिर कंपनी के टर्नओवर पर |
लेकिन ये भी माना गया है कि हर चिट फण्ड कंपनी फ्रॉड नहीं करती बल्कि कंपनी के कुछ लोगो के द्वारा ऐसा किया जाता है और इसका खामियाजा पूरी कंपनी और उससे जुड़े लोगो को उठाना पड़ता है |

पोंज़ी स्कीम्स

साधारनतया ये ‘पीटर तो पॉल’ स्कीम्स के नाम से पोपुलर है, इसका आधार भी कोई प्रोडक्ट नहीं होता है बल्कि नए रेक्रुटेर्स लाने का होता है और खास बात ये है कि जब किसी के द्वारा भी किसी नए रेक्रुटर को लाया जाता है तो लाने वाले को किसी प्रकार का कमीशन नहीं दिया जाता है | बल्कि जितने ज्यादा लोग जुड़ने तब कमीशन मिलेगा ऐसा कुछ इस तरह के बिज़नस में होता है | किसी प्रकार का कोई मुख्य बिज़नस नहीं होता बस थोडा लगाओ और ज्यादा पो वाला हिसाब होता है |

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