Direct Selling business in India will be 15-20 billion by 2025 Hindi

माना जा रहा है कि 2025 तक भारत में डायरेक्ट सेलिंग का बिज़नस 15-20 बिलियन डॉलर का होने वाला है क्योंकि कुछ छोटे उधमी, मध्यम वर्गीय छोटे बिज़नस तेज़ी से डायरेक्ट सेल्लिंग को अपना कर अपना बिज़नस को बढाने में लगे है | एक रिपोर्ट में FICCI-KPMG INDIA के द्वारा कहा गया कि भारत में डायरेक्ट सेलिंग का बिज़नस 75 बिलियन तक गिरा है लेकिंग पिछले 4 सालो में 16 प्रतिशत की दर से जो डायरेक्ट सेल्लिंग में इजाफा हुआ है, इससे भारत में बहुत सारी कम्पनीज को आकर्षित किया है और  डायरेक्ट से में आने के लिए सोचने पर मजबूर कर दिया है |
कहा जा रहा है कि भारत में डायरेक्ट सेलिंग का बिज़नस लगभग 20 बिलियन तक बढेगा क्योंकि मिडिल क्लास फैमिलीज़ को कि डायरेक्ट सेलिंग के बिज़नस से जुडी हुई है, कम्पनीज उनको मोटा मुनाफा देने वाली है | और लोगो को डायरेक्ट सेलिंग में आने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है | रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में डायरेक्ट सेलिंग के प्रति ऐसा माहोल तेयार किया जाए जिससे की लोगो जुड़ने में आसानी हो और किसी प्रकार की समस्या का सामना ना करना पड़े |
एक रिपोर्ट के अनुसार भारत की राजधानी दिल्ली में तेज़ी से लोग डायरेक्ट सेलिंग की तरफ आगे बाद रहे है और पिछले साल 2013-14 में 2 से 3 लाख लोगो द्वारा डायरेक्ट बिज़नस को अपनाया गया है | देखा जा रहा है कि रहने के और जीने के खर्चे बहुत बड़ते जा रहे है और एक साधारण नौकरी में इतना पैसा नहीं है तो इसलिए भी लोग इसको एक्स्ट्रा इनकम के सोर्स के तौर पर देख रहे है और अपना रहे है | डायरेक्ट सेलिंग बिज़नस 2025 तक दिल्ली एक अन्दर 4 से 5 लाख लोगो खुद के बिज़नस का अवसर प्रदान करेगा | इन सब बातो को देखते हुए कहा जा रहा है कि बाज़ार की ग्रोथ बहुत तेजी से बढेगी और सरकार का साथ भी इसमें होगा और साथ ही साथ गवर्नमेंट के indirect taxes में भी 2025 तक 1500 से 2000 मिलियन तक का इजाफा होने वाला है | संस्था के द्वरा ये भी कहा गया की भारत में अभी तक डायरेक्ट सेलिंग के प्रति कोई सिस्टेमेटिक तरीका या फिर पालिसी को नहीं अपनाया गया, ये भी एक कारण है की लोग इसकी तरफ कम आकर्षित होते है और साथ ही साथ ये बाज़ार पर भी प्रभाव डालती है |
FICCI के द्वारा कहा गया कि भारत में डायरेक्ट सेलिंग के लिए अभी स्य्स्तेमती वातावरण तेयार करना जरुरी है | राज्य स्तर और केंद्र स्तर पर अलग अलग नियम होने चाहिए जिससे जी कंपनियां सही तरीके से काम कर सके | और कुछ भी होने पर सारे मामले सरकार के अधीन जाने चाहिए |

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