डायरेक्ट सेलिंग और पोंज़ी स्कीमों में अंतर

1. बेसिक डेफिनिशन

डायरेक्ट सेलिंग – एक डायरेक्ट सेलर के द्वारा किसी प्रोडक्ट की मार्केटिंग करना और ये साधारनतया कहीं से भी की जा सकती है घर से या फिर कस्टमर की लोकेशन पर | एक डायरेक्ट सेलर के द्वारा कस्टमर को प्रोडक्ट का explanation किया जाता है, जब तक कस्टमर को प्रोडक्ट के बारे में समझ में ना आये |
पिरामिड पोंज़ी स्कीम – इसमें मुआवजा प्रोडक्ट सेल के ऊपर निर्भर नहीं करता बल्कि नए आने वाले लोगो पर निर्भर करता है |

2. लक्ष्य

डायरेक्ट सेलिंग – प्रोडक्ट को बहुत बड़ी मात्र में बेचना |
पिरामिड पोंज़ी स्कीम – सिर्फ इसी पर जोर दिया जाता है कि नए इन्वेस्टर या फिर सब्सक्राइबर को लाया जाए जिससे की आप आसानी से पैसे कम सके |

3. अवसर देना

डायरेक्ट सेलिंग – ये असली बिज़नस का अवसर देता है जिसमे प्रोडक्ट के लम्बे समय तक चलने वाले प्लान निहित होते है |
पिरामिड पोंज़ी स्कीम – किसी भी तरह के प्रोडक्ट को बेचने या फिर उसकी वेलु के बार में बात की जाती है | और कंपनी का फ्यूचर नहीं होता |

4. घुसने का पैस

डायरेक्ट सेलिंग – किसी भी प्रोडक्ट के लिए या तो कुछ भी फीस नहीं होती या फिर प्रोडक्ट की बहुत कम फीस होती है |
पिरामिड पोंज़ी स्कीम – अपेक्षाकृत बहुत ज्यादा होती है |

5. प्लान और स्कीम

डायरेक्ट सेलिंग – सभी प्लान्स प्रोडक्ट की सेल के ऊपर निर्भर करते है | डिस्ट्रीब्यूटर के द्वारा प्रोडक्ट की सेल  और सर्विस की पहचान की जाती है |
पिरामिड पोंज़ी स्कीम – सभी प्लान्स पैसे के ऊपर निर्भर होते है और नए आने वाले रेक्रूटर के ऊपर भी | कोई प्रोडक्ट बेस नहीं होता |

6. नामांकन जरुरी

डायरेक्ट सेलिंग – बिज़नस करने के लिए नए आने वाले रेक्रूटर को अपना नामाकंन करवाना अनिवार्य नहीं होता बल्कि इसका मुख्य कार्य सिर्फ प्रोडक्ट की सेल को बढाना होता है |
पिरामिड पोंज़ी स्कीम – किस भी रेक्रूटर को बिज़नस करने के लिए अपना नामांकन करवाना जरुरी होता है क्योंकि सारा कमीशन नए आने वाले रेक्रूटर के ऊपर निर्भर करता है | अगर वो नहीं आयगा तो आपका कमीशन नहीं बनेगा |

7. आधारभूत प्रोडक्ट

डायरेक्ट सेलिंग – प्रमाणित हो चुके ब्रांड्स नेम्स की मार्केटिंग निहित होती है |
पिरामिड पोंज़ी स्कीम – या तो कोई प्रोडक्ट नहीं होता, या फिर प्रोडक्ट के बारे में कस्टमर को नहीं बताया जाता या कस्टमर को बेचा भी नहीं जाता |

8. वापसी और गारंटी

डायरेक्ट सेलिंग – डायरेक्ट सेलर और एक उपभोक्ता के बचाव पक्ष को देखते हुए इसमें गारंटी दी जाती है की आपका प्रोडक्ट वापस किया जायगा अगर पसंद ना आये तो |
पिरामिड पोंज़ी स्कीम – प्रोडक्ट पर किसी प्रकार की वापसी की गारंटी नहीं होती है या फिर इसको व्यव्हार में नहीं लाया जाता |

9. वस्तु की लिस्ट

डायरेक्ट सेलिंग – प्रोडक्ट की सप्लाई डिमांड के आधार पर ही की जाती है और डायरेक्ट सेलर को प्रोत्साहित किया जाता है की वो अपने पास सभी प्रोडक्ट की लिस्ट रखे और प्रोडक्ट की कमी पड़ने पर वापस उनका भरब किया जा सके | लेकिन आजकल की सञ्चालन व्यवस्था ऐसी हो गयी है कि किसी दिस्त्र्बुटर को सामान की लम्बी लिस्ट नहीं रखनी पड़ती जैसे ही माल की कमी होती है वेसे ही वहां पर हाथो हाथ सामन पहुंचा दिया जाता है |
पिरामिड पोंज़ी स्कीम – किसी भी प्रकार की कोई लिस्ट नहीं होती है | प्रोडक्ट को वापस या फिर से नहीं बेचा जा सकता है |

10. ट्रेनिंग

डायरेक्ट सेलिंग – प्रोडक्ट को बेचने के लिए सही ट्रेनिंग की अनिवार्यता होती है |
पिरामिड पोंज़ी स्कीम – प्रोडक्ट या फिर सर्विस को बेचने के लिए ट्रेनिंग की प्रमुखता नहीं होती है |

11. बाहर निकलने की व्यवस्था

डायरेक्ट सेलिंग – इसमें किसी भी डायरेक्ट सेलर के द्वारा कंपनी से कभी भी वापस जाया जा सकता है |
पिरामिड पोंज़ी स्कीम – इसमें बाहर निकलने की कोई पालिसी नहीं होती है |

12. रिटर्न्स एंड उससे जुडी रिस्क

डायरेक्ट सेलिंग – एक डायरेक्ट सेलर के द्वारा शुरू में कितना इन्वेस्ट किया गया था और बाज़ार के उतर चदाव पर रिटर्न्स निर्भर करते है | इसलिए रिटर्न्स, प्रोडक्ट कितनी बार बेचा गया है इसकी वैल्यू पर निर्भर करता है ना कि कितने लोगो को बेचा गया है |
पिरामिड पोंज़ी स्कीम – सभी रिटर्न्स नए ज्वाइन होने वाले रेक्रूटर की फीस के ऊपर निर्भर करते है | उसकी एक्टिविटी पर निर्भर करता है कि वो बाज़ार में कितना काम कर रहा है | जितने ज्यादा लोग जुड़ने उतनी ज्यादा कमाई होती है अगर कोई नहीं जुड़ता तो कुछ नहीं मिलता |

13. सेल पर incentive

डायरेक्ट सेलिंग – हर डायरेक्ट सेलर को उसकी कंपनी द्वारा उसकी हर सेल पर उसको incentive दिया जाता है | वो भी डायरेक्ट बैंक के द्वारा |
पिरामिड पोंज़ी स्कीम – incentive इस पर निर्भर करता है कि आपने कितने लोगो को जोड़ा है ना कि प्रोडक्ट कितना बेचा है | पेमेंट भी ऊपर वाले मेम्बर के द्वारा या फिर प्रोमोटर के द्वारा दी जाती है |

14. रजिस्ट्रेशन License

डायरेक्ट सेलिंग – डायरेक्ट सेलिंग बिज़नस भारत सरकार के अंतर्गत रजिस्टर्ड होता है या तो लोकल तौर पर या फिर किस भी तरह से | और कानूनी तौर पर कंपनी के पास license होता है |
पिरामिड पोंज़ी स्कीम – इस तरह की स्कीम देने वाली कंपनियां  रजिस्टर्ड नहीं होती और किसी सरकार की किसी भी संस्था से सम्बन्ध नहीं रखती है |

15. नियम

डायरेक्ट सेलिंग – हर डायरेक्ट सेलर को डायरेक्ट सेलिंग एसोसिएशन द्वारा बनाये गए नियमो के अंतर्गत रहकर कार्य करना पड़ता है |
पिरामिड पोंज़ी स्कीम – इसमें ऐसा कुछ भी नहीं होता है |

16. रहस्यमयी योजनाये

डायरेक्ट सेलिंग – इस तरह के बिज़नस में क्लियर रूल्स एंड रेगुलेशन होते है जो कि लिखे हुए होते है और जब कोई नया आदमी ज्वाइन होता है तो उसको बताया जाता है कि कंपनी की भविष्य में क्या योजनाये है |
पिरामिड पोंज़ी स्कीम – इसमें कोई भी जानकारी लिखित में नहीं होती है |

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