क्या आप पाजिटिविटी से दूर है ?

कई बार मन में आने वाले नकारात्मक विचार हमें कुछ इस तरह से घेर लेते है जिससे की हमारी सोच ही नकारात्मक होती जाती है और जीवन में सिर्फ निराशा ही दिखती है | कुछ सवालो से जानते है आप सकारात्मक है या नकारात्मक |
1. किसी भी काम को शुरू करता हूँ तो सबसे पहले नकारात्मक विचार ही दिमाग में आते है ?
हाँ – किसी भी काम की शुरुआत अच्छे विचारों से होनी चाहिए, लेकिन मन में कई बार शमता को लेकर आशंका बनी रहती है | कहीं आपके मन में कोई शंक्त तो नहीं, अगर है तो सबसे पहले उसको दूर करना चाहिए | क्योंकि जब तक आप इस पर काम नहीं करेंगे तब तक आपका चित्त स्थिर नहीं रहेगा |
ना – अच्छी बात है कि आपके मन में शांति बनी रहती है | जिसकी वजह से आप आराम से काम कर सकते है | नकारात्मक विचारो से दिमाग में काफी जोर पड़ता है, लेकिन आपके लिए अच्छी बात है कि आप इसमें ध्यान नहीं देते |
2. मुझे लगता है कि नकारात्मकता मेरा पीछा नहीं छोड़ रही है ?
हाँ – नकारात्मक हो या सकारात्मक दोनों ही तरह के विचार मन में आते रहते है | यह कहना गलत होगा कि नकारात्मक विचार मेरा पीछा नहीं छोड़ते है | क्यों विचार व्यक्ति के पीछे नहीं भागते बल्कि व्यक्ति विचारों के पीछे भागता है | अगर आप नकारात्मकता के पीछे जायेंगे ही नहीं तो वो आपके पीछे कैसे पड़ेगी |
ना – अच्छी बात है कि आप यह समझ गए है कि मन में विचारों का आवागमन होता रहता है | नकारात्मक विचार मन में उलझन पैदा करते रहते है | इसलिए पॉजिटिव बनाना चाहिए |
3. में लोगो के नेगेटिव विचारों से परेशान हो जाता हूँ ?
हाँ – कुछ लोगो की यह आदत रहती है कि सामने वाले के काम में व्यवधान कैसे पहुँचाना है ? इसलिए वो नकारात्मक बातें करके आपका काम बिगाड़ने के फिराक में रहते है | ऐसे में आपको उनसे बचना चाहिए | इसी पर एक गाना भी है, कुछ तो लोग कहेंगे, लोगो का काम है कहना… इसलिए लोगो की गलत बातों को दरकिनार करते हुए अपने काम में मन लगाना चाहिए | फिर चाहे परिणाम जो भी हो इसकी चिंता नहीं करनी चाहिए |
ना – अच्छी बात है कि आप लोगो की बातों पर ध्यान नहीं देते है | लेकिन न केवल आपको नेगेटिव लोगो से दूर रहना है बल्कि उनको समझाना भी नहीं है | क्योंकि वो आपकी बातों को समझने की बजाय आपसे मतभेद बना सकते है | इसलिए उनको उन्ही के हाल पर छोड़ना बेहतर होता है |
4. मेरे मन में विचारों का द्वन्द चलता रहता है | जो हावी हो जाता है में उसी का पालन करने लगता हूँ ?
हां – हर सिक्के के दो पहलू होते है ठीक उसी तरह विचार भी दो तरह के होते है ( सकारात्मक / नकारात्मक ) दोनों के अपने-अपने तर्क-कुतर्क होते है | इसलिए इनमे द्वन्द होता रहता है | आपको यह समझने की जरुरत है कि नकारात्मक विचार का परिणाम अक्सर गलत ही हो यह जरुरी नहीं होता | कभी-कभी उनसे बड़ी सीख भी मिल सकती है | इसलिए नकारात्मकता के खिलाफ खुद को तेयार करना चाहिए | अंतर्द्वंद तो चलता रहता है, खुद को उससे निकलते हुए सही रास्ता अपनाए |
ना – यह अच्छा है कि आप मन के स्वरुप को पहचान गए है | इसलिए मन के बहकावे में आने से बच जाते है | आप सही रस्ते में चल रहे है यह अच्छी बात है इसे ऐसे ही बनाये रखिये |
5. हमेशा यह डर लगा रहता है कि कहीं नकारात्मक विचार सच हो गए तो ?
सुझाव – नकारात्मक विचारों का सबसे बड़ा डर यही रहता है कि कहीं वह सच साबित न हो जाये | वैसे देखा जाये तो किसी भी निर्यण का परिणाम कुछ भी हो सकता है | इसलिए हमको अक्सर संभावनाओ को तलाशना चाहिए | यह भी देखा गया है कि विचारों के उलट परिणाम आ जाते है |

 

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