10 प्रकार के मोबाइल डिस्प्ले और टचस्क्रीन

मोबाइल के बाज़ार में अलग अलग प्रकार के स्मार्ट मोबाइलस में अलग अलग प्रकार की डिस्प्ले आती है और इसकी जानकारी हमें होनी चाहिए कि डिस्प्ले कौन कौन से प्रकार के होते है ताकि हमें मोबाइल खरीदने में कोई परेशानी का सामना ना करना पढ़े | जैसे जैसे मोबाइल का बाज़ार बढ़ रहा है वैसे वैसे नयी नयी टेक्नोलॉजीज सामने आ रही है | तो इस पोस्ट में में आपको बताने वाला हु अलग अलग प्रकार के मोबाइल डिस्प्ले के बारे में, उनके क्या अच्छी चीज़े है और उनमे क्या बुरा है सब कुछ |

TFT LCD

TFT का मतलब है थिन फिल्म ट्रांजिस्टर टेक्नोलॉजी | बाकि सब में TFT सबसे सामान्य एलसीडी टाइप है जो मोबाइल्स फोंस में इस्तेमाल होती है | TFT आपको अच्छी इमेज क्वालिटी प्रदान करता है और इसका रेसोलुशन भी अच्छा होता है अगर इससे पुराणी टेक्नोलॉजीज के इसकी तुलना की जाये तो पर इसकी कुछ खामियां भी है और वो ये है कि अगर आप सामने से देखने को सब कुछ सही दिखेगा पर अगर आप थोडा सा टेड़ा कर के देखेंगे तो आपको शायद डिस्प्ले में कुछ साफ़ दिखाई ना दे और सनलाइट और तेज़ लाइट में डिस्प्ले में कुछ सही से नहीं दीखता है |
बढे TFT डिस्प्ले को बहुत जयादा पॉवर की जरुरत पड़ती है इसलिए ये बेट्री के हिसाब से सही नहीं है | पर जैसे मोबाइल का मार्किट बाधा तो मोबाइल सस्ते होते गए और इसी श्रेणी में इस प्रकार का डिस्प्ले का इस्तेमाल ज्यादा होने लगा | क्योंकि कम पैसे ज्यादा खूबियों के साथ एक बढ़ा डिस्प्ले भी तो चाहिए न |

IPS-LCD

आईपीएस का मतलब है इन-प्लेस स्विट्चिंग | अगर आप TFT और IPS डिस्प्ले की आपस में तुलना करेंगे तो पाएंगे कि साधारण TFT एलसीडी की तुलना में आईपीएस डिस्प्ले बेहतर है | इसका कारण यह है कि इस डिस्प्ले को आप किसी भी एंगल से देखिये सब कुछ सही दिखेगा और साथ ही साथ ये पॉवर भी कम खर्च करता है जिसकी वजह से मोबाइल्स में बेट्री की लाइफ बढ़ी है | इस प्रकार की डिस्प्ले TFT एलसीडी से महंगी होती है इसी कारण से यह सिर्फ महंगे स्मार्ट मोबाइल्स में ही पायी जाती है |इसका सबसे ज्यादा resolution 640 x 960 पिक्सेल था जो कि एप्पल के iPhone 4 में इस्तेमाल किया गया था और ये रेटिना डिस्प्ले के नाम से भी जाना गया था क्योंकि इसकी पिक्चर क्वालिटी बहुत ही बढ़िया थी |

Resistive टचस्क्रीन एलसीडी

टचस्क्रीन एलसीडी डिस्प्ले 2 प्रकार की होती है रेसिस्टिव और कापसिटिव | resistive टचस्क्रीनस में 2 लेयर होती है जिनके बीच में एक कंडक्टइव मटेरियल होता है जो कि रेजिस्टेंस की तरह काम करता है | जब ऊँगली के द्वारा resistive टचस्क्रीन को टच किया जाता है तो उन दोनों के बीच में जो मटेरियल है वो ऊपर वाली और नीचे वाली दोनों के बीच में होने के कारण, टच होते ही एक सर्किट बना दिया जाता है | और इस टच की पहचान मोबाइल के प्रोसेसर चिप के द्वारा की जाती है वह से पास होने के बाद मोबाइल के ऑपरेटिंग सिस्टम के द्वारा इसकी पहचान की जाती है |
capacitive टचस्क्रीन जितनी रेस्पोंसिवे होती है उसके मुकाबले resistive टचस्क्रीन नहीं होती और इसलिए कभी कभी टच करने के लिए किसी प्रकार के पेन की जरुरत पड़ती है | इस तरह की टेक्नोलॉजी कम प्राइस वाले मोबाइल्स में ही इस्तेमाल की जाती है |

Capacitive Touchscreen LCD

capacitive टचस्क्रीन टेक्नोलॉजी में एक ग्लास की लेयर होती है जिसमे ट्रांसपेरेंट कंडक्टर की कोटिंग लगी होती है और ये indium tin oxide की हो सकती है | जैसे ही किस इंसान के द्वारा capacitive टचस्क्रीन तो टच किया जाता है तो एक interruption बनता है ये एक तरह की इलेक्ट्रोस्टेटिक फील्ड होती है और इसके द्वारा capacitance में बदलाव की पहचान की जाती है, इसके बाद इसकी पहचान एक मोबाइल के प्रोसेसर चिप के द्वारा की जाती है इसके बाद इसको आगे भेजा जाता है मोबाइल सॉफ्टवेर के पास जिससे की टच की पहचान पूरी हो सके और ये काम करने लगे |

OLED

oled का मतलब होता है आर्गेनिक लाइट एमिटिंग डायोड और ये नए प्रकार की टेक्नोलॉजी है जो आजकल मोबाइल्स और मॉनीटर्स में इस्तेमाल हो रही है | इस तरह की टेक्नोलॉजी में 2 कांदुक्टींग शीट्स (कैथोड और अनोड़) के बीच में कार्बन based आर्गेनिक मटेरियल भरा जाता है और इसको दोनों और से बंद कर दिया जाता है | जब इन दोनों शीट्स के ऊपर इलेक्ट्रिक पल्स लगता है तो बीच में भरे हुए कंडक्ट से लाइट बनती है और डिस्प्ले की ब्राइटनेस और कंट्रास इलेक्ट्रिक पल्स के ऊपर निर्भर करती है | अगर इस प्रकार की OLED’s को एलसीडी से तुलना करें तो ये उनसे बहुत बेहतर है फिर चाहे वो किसी भी ताज़रिये से हो .. रेस्पोंसे से, कलर से, ब्राइटनेस से, अंगल व्यू से |

AMOLED

amoled का मतलब है एक्टिव मैट्रिक्स आर्गेनिक लाइट एमिटिंग डायोड | ये भी एक प्रकार की oled डिस्प्ले ही है जो तेज़ी से बढ़ रही है और काफी मोबाइल्स में इस्तेमाल की जा रही है | जिस प्रकार oled में बहुत खूबियाँ थी उसी प्रकार इसमें भी है जैसे… अच्छे डिस्प्ले कलर्स, कम वजनी, अच्छी बेट्री लाइफ, अच्छी ब्राइटनेस और शार्पनेस साथी ही सहत हाल्डे डिजाईन |

Super AMOLED

सुपर amoled पहले आई हुई amoled का ही एक और एडवांस्ड वर्शन है जो सैमसंग के द्वारा बनाया गया है | इस तरह के डिस्प्ले में टच सेंसर लगे होते है जिसके वजह से इस तरह का डिस्प्ले और भी पतला हो गया है जो की पहले मोटा हुआ करता था | सैमसंग के द्वारा बनाये गए इस डिस्प्ले को सैमसंग ने अपने काफी मोबाइल्स में इस्तेमाल किया है और आगे भी करता रहेगा |

Retina Display

रेटिना डिस्प्ले इस तरह का नाम एप्पल के द्वारा अपने हायर resolution (640×960) मोबाइल एप्पल iphone 4 में इस्तेमाल किया गया था | इसको रेटिना डिस्प्ले कहा गया था क्योंकि इसके इंसान की आँख से नहीं देखे जा सकते थे और डिस्प्ले सुपर शार्प और बहुत बढ़िया दीखता था |

Haptic / Tactile टचस्क्रीन

हप्टिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल blacberry और नोकिया के द्व्रारा उनके मोबाइल्स में किया गया था | इस तरह की टेक्नोलॉजी में महसूस करने वाली कुछ तकनीक का इस्तेमाल किया गया जिसकी वजह से गलत जगह पर टच होने पर उसको सही किया जा सके | इस तरह की टेक्नोलॉजी से टाइपिंग अच्छे से हो पाती है |

Gorilla Glass 

गोरिल्ला गिलास में एक अलग प्रकार का alkali-aluminosilicate ग्लास की शील्ड लगी होती है जिसकी वजह से इसमें scratches नहीं पड़ते और गिरने पर भी डिस्प्ले पर कोई असर नहीं पड़ता और रोज़ इस्तेमाल करने के हिसाब से इसको बनाया गया है | आजकल बहुत सारी कंपनिया जैसे:- मोटोरोला, सैमसंग, और नोकिया अपने मोबाइल को और मज़बूत करने के लिए इस तरह के ग्लासेज इस्तेमाल कर रही है | अगर आप भी कोई मोबाइल खरीद रहे है तो गोरिल्ला गिलास वाला खरीदना आपके लिए कुछ हद तक बेहतर हो सकता है |
अगली बार जब आपसे कोई पूछेगा कि TFT और IPS capacitive टचस्क्रीन के बारे में तो आप चुप मत बेठियेगा क्योंकि अब आप सब कुछ जानते है | अगर आपको और कुछ जानकरी भी चाहिए जो इस पोस्ट में नहीं है तो आप मुझे कमेन्ट में लिख सकते है, में कोशिश करूँगा कि आपकी कुछ मदद कर सकूँ |
पढने के लिए धन्यवाद !

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